पालघर में साधुओं की हत्या का मूल कारण अशिक्षा या अफवाह ?

बीते दिनों महाराष्ट्र राज्य के पालघर में दो साधुओं और उनकी गाड़ी के ड्राइवर की हत्या भीड़ द्वारा पीट पीट कर, कर दी गयी। वो भी पुलिस की मौजूदगी में। वास्तव में चिंताजनक घटना है। इसलिए नहीं कि मरने वाले साधु थे, मरने वाला कोई भी हो, किसी भी जाति, मजहब, क्षेत्र का हो परन्तु बिना किसी ठोस वजह के ऐसी निर्मम हत्या क्यों ? तीन लोगों की क्रूर हत्या और वो भी केवल अफवाह के आधार पर ? ये घटना मानवता पर कलंक है।

मुझे शब्द नहीं मिल रहे थे कि अपने विचारों को किस कदर बयाँ करूँ, फिर भी एक छोटा सा प्रयास करता हूँ अपने विचारों को आप तक पंहुचाने का-   

सन्यासियों की हत्या ,

वो भी ग्रामवासियो की भीड़ द्वारा,

पुलिस की मौजूदगी में ,

सबसे बड़ी बात हमारे देश भारत मे !

जहाँ भगवा वेश को ही आदर मिलता है !

जहाँ उद्घोष है :-

धर्म की जय हो,

अधर्म का नाश हो,

प्राणियों में सद्भावना हो,

विश्व का कल्याण हो !

sadhu      sadhu 

संभावित कारण - अफवाहे , जाहिल भीड़ व आवारा-मूर्ख लोगो के समूह। भीड़ का चेहरा नही होता पर उसके हाथ व पैर कनखजूरे की तरह असंख्य होते हैं। दिमाग, तर्क, सोच-समझ कुछ नही, बस केवल अंधेरे की मानसिकता जिसमें कोई किसी से परिचित नहीं। केवल एक अनजान अपुष्ट अफवाह के सहारे ये भीड़ मानवता की बहुत बड़ी शत्रु बन जाती है।

उदाहरण :-

चोटी कटवा गैंग की अफवाह, जिस के चलते देश मे सैंकड़ो लोग शिकार हुए, आधार कुछ नही था।

मुंह नोचवा की अफवाह जिसने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार में कई महिनो तक कानूनी एजेंसियों की नींद हराम कर दी थी।

बच्चा चोरी की अफवाह जिसने झारखण्ड, छत्तीसगढ़ में कई निर्दोषो की जान ले ली थी।

पोलियो टीके से मौत की अफवाह ने पोलिओ उन्मूलन अभियान में कठिनाइयां पेश की।

सरकार के परिवार नियोजन अभियान में तो अफवाहों ने देश मे गदर मचा दिया था।

गुजरात के सूरत में प्लेग की अफवाह ने कपड़ा उद्योग को ठप्प कर दिया था। बड़े-बड़े कारखाने बन्द होने की कगार पर आ गए।

बिहार में नमक की कमी की अफवाह ने बिहार की दुकानों व गोदामो से लोग नमक लूट कर ले गए थे। ले जाएँ भी क्यों न ! भीड़ जो है। हिंदुस्तान की असंख्य, अशिक्षित भीड़ जिसे कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति किसी भी दिशा में दौड़ा सकता है।

महात्मा गांधी की हत्या के बाद महाराष्ट्र में लोगो ने ब्राह्मणों व संघ से जुड़े लोगों के घर जला दिए थे। एक के बाद एक कई घर उजड़ गए जो शायद फिर से न बस सके हों।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश मे सिख समुदाय को बड़ी संख्या में हत्याओ व लूट का दंश झेलना पड़ा था। इसका दोसी कौन था। शायद कोई एक नाम नहीं लिया जा सकता। भीड़ का कोई नाम थोड़े ही होता है।

और भी बहुत सी घटनाये गाहे बगाहे हमारे प्रदेश-देश-समाज को डसती रहती हैं !

कश्मीर में तो भारतीय सुरक्षा बल इन अफवाहों के साथ आये दिन जूझते हैं !

आखिर इन अफवाहों से खडी हुई भीड़ व उससे उतपन्न समस्याओ की जड़ क्या है ? और इसका समाधान क्या है ?

मेरे विचार में सबसे बड़ा कारण है अशिक्षा, अंधविश्वास व डर का भाव। उसके बाद इसमे फायदा ढूंढते हैं शातिर अपराधी व समाज विरोधी शक्तियां जो इन अफवाहों और बातों के बीच अति सक्रिय हो उठती हैं और उनकी निजी महत्वाकांक्षाएं सध जाती हैं !

greedy politicians     Greedy politicians

निवारण : वर्तमान समय मे पुलिस का आंतरिक सूचना तंत्र कमजोर हो गया है जिसके चलते सही सूचनाएं समय पर नही पहुंच पाती हैं !

राजनीतिक लोगो मे सामाजिक जिम्मेदारी व सामूहिक उत्तरदायित्व का अभाव। शातिर लोगो पर निगरानी व नियंत्रण ,

सबसे बड़ी जिम्मेदारी है गली मोहल्ले गांव शहर में रहने वाले जिम्मेदार नागरिको में सार्वजनिक उत्तरदायित्व भाव का अभाव।

ये राजतंत्र नही है, न ही विदेशी शासन व्यवस्था है, हम सभी को इसमे भागीदारी उत्तरदायित्व बोध आवश्यक है। इस तरह की घटनाएं हमारी सामाजिक सभ्यता पर कलंक हैं।

राजाओ, मुगलो , अंग्रेजों के समय भी इस तरह के सामूहिक अपराधों व उस समय उस क्षेत्र के लोगो की सहभागिता, मूक समर्थन , सरकार को सूचना न देने , उसको छिपाने पर सामूहिक जुर्माना व सजा दी जाती थी , ऐसा भारतीय दंड संहिता में भी है !

आवारा भीड़ का स्थान समय अलग हो सकता है, परन्तु उसका स्वभाव एक सा रहता है । 

आशा है लेख आपको पसन्द आया होगा। जैसा भी हो नीचे कॉमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर लिखें और पोस्ट को शेयर करें ताकि हम आपके अनुरूप ही और पोस्ट्स लाते रहें।

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