कहाँ गया बेबीलोन का झूलता बगीचा जो स्वर्ग का द्वार कहलाता था।

ईश्वर ने यह संसार एक ऐसे रूप में बनाया है जहाँ कई प्रकार के आश्चर्य दिखाई पड़ते हैं। हम पहले दुनिया के 7 आश्चर्यों की बात किया करते थे परंतु अब विज्ञान और तकनीकी की उन्नति ने संसार में आश्चर्यों की भरमार सी कर दी है। आज हम एक ऐसे ही आश्चर्य की बात करेंगे जो अपने समय से बहुत आगे था।

 

एक बहुत ही प्राचीन शहर का नाम है बेबीलोन। किसी जमाने में यह बेबिलोनिया राज्य की राजधानी थी। ग्रीक भाषा में बेबीलोन का अर्थ है - "स्वर्ग का दरवाजा"। इतिहासकारों ने इस नगर की सुंदरता और इसके वैभवशाली स्वरूप का वर्णन करते हुए बहुत सी बातें कही हैं। यह शहर बहुत बड़ा था। जिस आकर्षक ढंग से यह बनाया गया था, उसकी कहानी आज भी वहाँ के टूटे फूटे अवशेष बड़े ही गर्व के साथ बतलाते हुए से जान पड़ते हैं। यह शहर 15 मील की लंबाई में बसा हुआ था। शहर बड़ा ही दर्शनीय था। बाग-बगीचे, राजभवन, मन्दिर सब एक से बढ़कर एक सुंदर और आकर्षक थे। यहाँ की सबसे आश्चर्यजनक रचनाओं में वह अद्भुत बगीचा था। ऐसा कहा जाता है कि बेबीलोन के राजा ने अपनी पत्नी की प्रसन्नता के लिए इस अद्भुत बगीचे का निर्माण करवाया था।

Hanging Garden of Babylon Hanging Garden of Babylon

इस बगीचे को तैयार करवाने के लिए सबसे पहले बड़े बड़े खम्बे गड़वाये गए और फिर इन खम्बों पर आधे चन्द्रमा की शक्ल का मैदान बनवाया गया। और फिर उस मैदान पर फिर खम्बे गड़वाये गए और उन खम्बों पर फिर मैदान। सबसे ऊपर का मैदान 22 फीट चौड़ा था। इन मैदानों का निर्माण करने में पत्थरों और सीमेंट तथा प्लास्टर की भी सहायता ली गयी। बिठाये गए पत्थरों के ऊपर मिट्टी की इतनी मोटी परत बिछाई गई कि उस पर बड़े बड़े पेड़ उग सकते थे। इन मैदानों में फव्वारे भी लगाए गए। तथा उस समय के अलग अलग देशों से पौधे मंगवाकर यहाँ लगाए गए। इन मैदानों पर झरने और नकली पहाड़ भी बनाये गए थे। मनोरंजन के लिए जगह जगह नृत्यघर भी बने थे। बगीचे में प्रवेश करने के लिए नीचे से ऊपर की और घुमावदार सीढ़ियाँ बनाई गईं थीं जिसके दोनों और पेड़ों और लताओं की कतारें लगी हुई थीं। विभिन्न तरह की रंगीन घास, छोटे-छोटे तालाब सब कुछ था वहाँ पर। वास्तव में बगीचा नहीं, स्वर्ग ही था वह।

babylon city    babylon city

इसी प्रकार राजा का निवास भी बहुत ही आकषर्क और स्वर्ग के समान ही सजा हुआ था। इस बगीचे के अलावा बेबीलोन में दूसरी सबसे देखने योग्य और आकर्षक रचना थी - "बेलास मन्दिर"। कहा जाता है कि बेलास बेबीलोन के निवासियों का एक बहुत बड़ा देवता था। इस मंदिर के बीच में सोने का पलँग, पलँग पर खूबसूरत गद्दा और उसके पास ही एक सुंदर सी मेज थी। परंतु वहाँ बेलास देवता की मूर्ति नहीं थी। उस जमाने के लोगों का विश्वास था कि बेलास देवता मन्दिर में निवास तो करते हैं परंतु दिखाई नहीं देते। मन्दिर में खम्बे भी सोने के थे। यह मिस्र के पिरामिडों से भी ऊँचा था। ज्योतिष शास्त्र से सम्बन्धित अनेक यन्त्र भी यहाँ उपलब्ध थे।

परन्तु कालांतर में इतने विशाल, अद्भुत और वैभव से भरपूर नगर का विनाश हो गया। आज भी इसके प्रसिद्ध उद्यानों, राजमहल, बेलास मन्दिर की प्राचीर और फरात नदी से निकाली गई विचित्र नहरों की कहानियाँ प्रसिद्ध हैं।

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